उत्तर प्रदेश के 27764 प्राथमिक विद्यालय पर लगेगा ताला। लगभग 5000 विद्यालय हुए मर्ज।लोगों में दिखा आक्रोश जाने पूरी खबर5000 प्राथमिक विद्यालय और उच्च प्राथमिक विद्यालयों का मर्जर किया जा चुका। और 27764 स्कूलों का मर्जर किया जाना है जिसका सोशल मीडिया पर स्कूल चले अभियान को शेयर करके लोग नाराजगी व्यक्त कर रहे और लोगों का कहना है कि बच्चे के अधिकार का हनन किया जा रहा है। वहीं सरकार का कहना है यदि प्राथमिक विद्यालय और उच्च प्राथमिक विद्यालयों का मर्जर किया जाएगा तो शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
मर्जर पर क्या है कोर्ट का फैसला
उत्तर प्रदेश सरकार के स्कूल मर्जर के खिलाफ सीतापुर की कृष्णा कुमारी के अलावा 51 बच्चों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में सरकार के खिलाफ याचिका दायर की है, याचिका कर्ता के वकील एलपी मिश्रा और गौरव मल्होत्रा ने 16 जून के सरकार के फैसले को मनमाना और गैर कानूनी बताया है|
सरकार की इस सरकार की इस फैसले को आर्टिकल 21A का उल्लंघन बताया है, सरकार की ओर से पेश हुए एडवोकेट जनरल अनुज उद्देशीया और चीफ स्टैंडिंग काउंसलर एसके सिंह द्वारा यह बताया गया कि स्कूलों में बच्चों की संख्या बहुत कम है इस कारण सरकार द्वारा यह फैसला लिया गया l ऐसे 56 स्कूल है जिसमें एक भी बच्चा नहीं है इसलिए सरकार द्वारा फैसला लिया गया कि इन स्कूलों का मर्जर आवश्यक है और मर्जर करके मर्जर किए गए स्कूलों में बच्चों को भेजा जाना उचित समझा इस कारण सरकार द्वारा यह फैसला लिया गया l
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस पंकज भाटिया ने पूछा कि सरकार ने मर्जर से पहले कोई सर्वे कराया गया है तो उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें l रिपोर्ट की माने तो जस्टिस पंकज भाटिया ने सरकार के पक्ष में 7 जुलाई 2025 को फैसला सुनाया, और याचिका रद्द कर दी l कोर्ट ने सरकार के मर्जर को लेकर रोक लगाने से मना कर दिया है l एडवोकेट जनरल अनुज उद्देशीया और चीफ स्टैंडिंग काउंसलर एसके सिंह यह बोला गया कि शिक्षा बोर्ड विभाग का उद्देश्य संसाधनों का सही उपयोग करना ड्रॉप आउट को कम करना और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना पहली प्राथमिकता है l
मर्जर की आवश्यकता क्यों पड़ी
- छात्रों की घटती संख्या: ग्रामीण इलाकों में पलायन, जन्म दर में गिरावट और निजी स्कूलों की बढ़ती लोकप्रियता के चलते सरकारी विद्यालयों में नामांकन घटा है।
- शिक्षक संसाधनों की कमी: अनेक स्कूलों में छात्र संख्या कम होने के बावजूद शिक्षकों की नियुक्ति या उपस्थिति असमान रही है, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रभावित होती है।
- प्रबंधन में सुधार: मर्जर के ज़रिए प्रशासनिक लागत कम होती है और संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकता है।
मर्जर के प्रमुख लाभ
- बेहतर संसाधन: एकीकृत विद्यालयों में पुस्तकालय, लैब, खेल सामग्री आदि की उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है।
- गुणवत्ता में सुधार: शिक्षकों का समुचित वितरण और निगरानी से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार संभव है।
- सामाजिक समावेश: मर्जर विद्यालयों में विविध पृष्ठभूमियों के छात्र एक साथ पढ़ते हैं, जिससे सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलता है।
मर्जर से चुनौतियाँ और चिंताएँ
- दूरी बढ़ना: मर्जर के बाद कई छात्रों को विद्यालय तक पहुंचने में अधिक दूरी तय करनी पड़ती है, जो विशेषकर छोटे बच्चों, लड़कियों और दिव्यांग छात्रों के लिए कठिन हो सकता है।
- ड्रॉपआउट दर में वृद्धि: दूरी, परिवहन की कमी और सुरक्षा की चिंता के कारण कुछ अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर सकते हैं।
- स्थानीय पहचान का नुकसान; गांवों के छोटे विद्यालय स्थानीय संस्कृति, भाषा और पहचान से जुड़े होते हैं| मर्ज से यह भावना कमजोर हो सकती है।
विद्यालयों का मर्ज एक विवेकपूर्ण नीति हो सकती है, यदि इसे सही तरीके से लागू किया जाए। यह शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और संसाधनों के बेहतर उपयोग का मार्ग प्रशस्त कर सकता है, लेकिन इसके लिए एक संवेदनशील, समावेशी और रणनीतिक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। केवल आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेने से वंचित वर्गों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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