दुनिया की निगाहें इस वक्त अमेरिका के अलास्का पर टिकी हुई हैं Trump-Putin , जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आमने-सामने बैठकर बातचीत करने वाले हैं। इस मुलाकात को यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की दिशा में सबसे बड़ी कूटनीतिक पहल माना जा रहा है।
भारत में Trump-Putin बैठक का समय
यह हाई-प्रोफाइल बैठक 15 अगस्त की सुबह 11 बजे (अलास्का समय) शुरू होगी। भारत में इसका सीधा असर समय के अंतर के कारण पड़ेगा और यहां यह मुलाकात 16 अगस्त की रात 12:30 बजे से देखी जा सकेगी। शुरुआती बातचीत ट्रंप के विमान में होगी, जिसके बाद दोनों नेता एक कोल्ड वॉर-युग के एयरफोर्स बेस पर मुख्य वार्ता करेंगे।

बातचीत के एजेंडे में क्या होगा खास?
सूत्रों की मानें तो दोनों राष्ट्राध्यक्ष सबसे पहले युद्धविराम (Ceasefire Deal) पर सहमति बनाने की कोशिश करेंगे। इसके अलावा, सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति, और अमेरिका-रूस के आपसी रिश्तों को बेहतर बनाने जैसे अहम मुद्दों पर भी चर्चा होगी।
रूस के विशेष दूत किरिल दिमित्रियेव ने कहा है कि यह बातचीत सिर्फ यूक्रेन तक सीमित नहीं होगी बल्कि पूरे द्विपक्षीय संबंधों को कवर करेगी।
ज़ेलेंस्की को क्यों नहीं बुलाया गया?
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की को इस वार्ता में शामिल नहीं किया गया है। हालांकि ट्रंप ने साफ किया है कि अगर यह बैठक सकारात्मक नतीजे लाती है तो आगे चलकर एक त्रिपक्षीय समिट आयोजित किया जाएगा जिसमें ज़ेलेंस्की को भी बुलाया जाएगा।
यूरोप की चिंता और वैश्विक संदेश
यूरोपीय सहयोगियों को चिंता है कि कहीं ट्रंप, रूस के कब्जे वाले यूक्रेन के 20% हिस्से को मान्यता न दे दें। उनके मुताबिक, यह फैसला यूक्रेन के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
दूसरी ओर, पुतिन के लिए यह मुलाकात यह साबित करती है कि रूस को अलग-थलग करने की पश्चिमी कोशिशें पूरी तरह नाकाम नहीं हुईं।

अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर असर
Trump-Putin वार्ता का असर केवल राजनीतिक स्तर तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कीमतें, स्टॉक मार्केट और ग्लोबल एनर्जी सेक्टर भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। यदि बातचीत से सकारात्मक संदेश निकलता है तो ऊर्जा बाज़ार में स्थिरता आने की उम्मीद जताई जा रही है।
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